उज्जैन महाकाल के दर्शन से बदलती है किस्मत

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन का सबसे पावन और शक्तिशाली स्थल है। जानिए इससे जुड़ी 12 खास बातें जो हर भक्त को जाननी चाहिए।

यह शिव का वो रूप है जो मृत्यु और काल पर नियंत्रण रखता है।

महाकालेश्वर को शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में पहला स्थान प्राप्त है।

महाकालेश्वर एकमात्र दक्षिणमुखी शिवलिंग है, जिसे अत्यंत शक्तिशाली माना गया है।

हर सुबह 4 बजे भस्म आरती होती है, जिसमें राख से शिव की पूजा होती है।

महाकाल मंदिर तंत्र साधना और शिव के गूढ़ रहस्यों का प्रमुख केंद्र है।

उज्जैन को कालों का नगर कहा जाता है, यह शिप्रा नदी के तट पर बसा है।

मंदिर की स्थापत्य कला मराठा शैली में है, जिसे पेशवाओं ने पुनर्निर्मित करवाया था।

इन पर्वों पर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

हर 12 साल में महाकाल की धरती पर सिंहस्थ कुंभ मेला लगता है।

यह मंदिर न केवल पूजा का स्थल है, बल्कि ध्यान और साधना का केंद्र भी है।

रेल, रोड और एयर से उज्जैन आसानी से पहुंचा जा सकता है। निकटतम एयरपोर्ट – इंदौर।

मंदिर सुबह 4 बजे से रात 11 बजे तक खुला रहता है। दर्शन से पहले नियमों को जान लें।

 10 मिनट में पहुँचें हर की पौड़ी – जानिए कैसे!